कोरोना वायरस महामारी जीएसटी संग्रह में कमी की मुख्य वजह

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नई दिल्ली। राज्य सरकार परेशान है कि केंद्र उन्हें वादे के अनुरूप जीएसटी क्षतिपूर्ति की राशि नहीं दे रहा है। पैसा नहीं मिलने से राज्यों का कोरोना से निपटना मुश्किल हो रहा है। ऐसे में एक लगातार दूसरे महीने केंद्र के जीएसटी संग्रह में कमी आई है। वित्त मंत्रालय ने बताया कि सकल माल एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह अगस्त महीने में 86,449 करोड़ रुपये रहा। यह लगातार दूसरा महीना है जब जीएसटी संग्रह कम हुआ है। इससे पहले, जुलाई में यह 87,422 रुपये था। सालाना आधार पर जीएसटी संग्रह 12 प्रतिशत कम रहा।

पिछले साल इसी महीने में माल एवं सेवा कर संग्रह 98,202 करोड़ रुपये था। सकल संग्रह में केंद्रीय माल एवं सेवा कर (सीजीएसटी) 15,906 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) 21,064 करोड़ रुपये, एकीकृत माल एवं सेवा कर (आईजीएसटी) 42,264 करोड़ रुपये और उपकर 7,215 करोड़ रुपये रहा। आईजीएसटी में आयातित वस्तुओं पर प्राप्त 19,179 करोड़ रुपये शामिल है।

कर विशेषज्ञों ने कहा कि राजस्व संग्रह का आंकड़ा संकेत देता है कि घरेलू आर्थिक गतिविधियों में तेजी आ रही है। संग्रह में कमी का मुख्य कारण आयात में कमी है। सरकार ने नियमित निपटान के तहत आईजीएसटी से सीजीएसटी मद में 18,216 करोड़ रुपये और एसजीएसटी में 14,650 करोड़ रुपये का निपटारा किया है।

मंत्रालय के अनुसार अगस्त, 2020 में नियमित निपटान के बाद केंद्र और राज्य सरकारों का कुल राजस्व सीजीएसटी के लिये 34,122 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिये 35,714 करोड़ रुपये रहा। बयान के अनुसार अगस्त में जीएसटी संग्रह पिछले साल 2019 के इसी माह में प्राप्त जीएसटी का 88 प्रतिशत है। अगस्त, 2020 के दौरान, बीते साल 2019 के समान महीने की तुलना में आयातित वस्तुओं से राजस्व 77 प्रतिशत और घरेलू लेनदेन (सेवाओं के आयात सहित) से राजस्व 92 प्रतिशत रहा।

मंत्रालय ने कहा कि 5 करोड़ रुपये से कम कारोबार वाले करदाताओं के लिए सितंबर तक रिटर्न भरने से छूट दी गयी है। जीएसटी संग्रह चालू वित्त वर्ष की शुरूआत से ही स्थिर है। इसका कारण कोविड-19 महामारी और उसकी रोकथाम के लिये ‘लॉकडाउन’ लगाया जाना है, जिससे आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं। हालांकि, आर्थिक गतिविधियां कोरोना वायरस महामारी से पहले भी धीमी पड़ रही थीं। अप्रैल में राजस्व 32,172 करोड़ रुपये, मई में 62,151 करोड़ रुपये, जून में 90,917 करोड़ रुपये और जुलाई में 87,422 करोड़ रुपये रहा।

पीडब्ल्यूसी के प्रतीक जैन ने कहा कि पिछले दो महीनों के रुख को दखें तो ऐसा लगता है कि संग्रह पिछले साल के इन्हीं महीनों की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत कम होकर स्थिर हो गया है। उन्होंने कहा, ‘‘चीजें अब धीरे-धीरे पटरी पर आ रही हैं, संग्रह आने वाले महीनों में बढ़ने की संभावना है।’’

डेलॉयट इंडिया के भागीदारी एम एस मणि ने कहा कि जीएसटी संग्रह सुधार के रास्ते पर है। घरेलू लेन-देन से होने वाला जीएसटी संग्रह पिछले साल के इसी माह के मुकाबले केवल 8 प्रतिशत कम है। यह आर्थिक गतिविधियों में पुनरूद्धार का संकेत देता है।

उन्होंने कहा, ‘‘जीएसटी संग्रह का राज्यवार आंकड़ा बताता है कि पुनरूद्धार प्रक्रिया से राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों में संग्रह में मामूली वृद्धि हुई है। वहीं हरियाणा और गुजरात में मामूली कमी आई है जबकि महाराष्ट्र, कर्नाटक और तमिलनाडु में उल्लेखनीय गिरावट आई है।’’

ईवाई के कर भागीदार अभिषेक जैन ने कहा कि जीएसटी संग्रह में कमी का एक प्रमुख कारण आयात है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार कम होने से आयात में कमी आयी है।

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