वित्तमंत्री जगदीश देवड़ा 21 को पेश करेंगे बजट, कोरोना का दिखेगा असर

  • इस बार सरकार सवा दो लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश कर सकती है, बजट में कुछ योजनाएं बंद की जा सकती हैं, तो कुछ योजनाओं के खर्च में कटौती की जा सकती है
  • एक-दो दिन में यह निर्णय लिया जा सकता है कि सत्र को टाल दिया जाए अथवा इसे 5 दिन से भी घटाकर दो या तीन दिन का कर दिया जाए

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सरकार के चौथे कार्यकाल का पहला बजट वित्तमंत्री जदगीश देवड़ा 21 जुलाई को विधानसभा में पेश करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बार सरकार सवा दो लाख करोड़ से ज्यादा का बजट पेश कर सकती है। बजट में कुछ योजनाएं बंद की जा सकती हैं, तो कुछ योजनाओं के खर्च में कटौती की जा सकती है। सरकार किसानों के कर्ज माफी पर भी बजट में अलग से प्रावधान कर सकती है। 

20 जुलाई से विधानसभा का मानसून सत्र शुरू होने जा रहा है। वित्त विभाग ने विधानसभा सचिवालय को सूचित किया है कि वित्त मंत्री 21 जुलाई को सदन में बजट पेश करेंगे। बजट पेश करने से पहले विधानसभा में ही कैबिनेट की बैठक होगी। बैठक में बजट पारित किया जाएगा। इसके बाद वित्त मंत्री इसे सजन में पेश करेंगे। 20 से 24 जुलाई तक चलने वाले सदन के पहले दिन दिवंगत सदस्यों को श्रद्धांजलि देने के बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी जाएगी और दूसरे दिन 21 जुलाई को बजट प्रस्तुत किया जाएगा। 

हालांकि इस बार बजट सत्र सिर्फ 5 दिन का है ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि 22 जुलाई को ही इस पर चर्चा कराने के बाद इसे पारित करा दिया जाएगा। हालांकि इस बार कोरोना संकट के चलते सदन की कार्यवाही को ओर एक या दो दिन करने की बात कही जा रही है। अगर ऐसा होता है। सदन का कार्यवाही दो दिन ही चलेगी और सारे कामकाज निपटा लिए जाएंगे।

विधानसभा का मानसून सत्र टलेगा या होगा छोटा 

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  • मप्र के मानसून सत्र पर भी कोरोना का संकट गहरा गया है। गृह विभाग के गाइडलाइन जारी करने के बाद विधानसभा मुश्किल पड़ गई है कि क्या करें, क्योंकि सत्र चलता है तो एक ही स्थान पर विधायकों समेत 500 से अधिक लोग एकत्रित हो जाएंगे। छह विधायक ऐसे हैं जो कोरोना पॉजिटिव हो चुके हैं। गुरुवार को इसी विषय पर विधानसभा की संसदीय कार्य विभाग के साथ चर्चा प्रस्तावित है। एक-दो दिन में यह निर्णय लिया जा सकता है कि सत्र को टाल दिया जाए अथवा इसे 5 दिन से भी घटाकर दो या तीन दिन का कर दिया जाए। 
  • सोशल डिस्टेंसिंग और प्रोटोकॉल के साथ कैसे व्यवस्थित किया जाए, इसी को लेकर विधानसभा कश्मकश में है। सत्र छोटा होता है तो इसमें अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव के साथ सिर्फ बजट को ही पास कराए जाने पर विचार होगा। राज्य सरकार के सामने संवैधानिक संकट बजट पास कराने का भी है। संवैधानिक बाध्यता के कारण सत्र चलता है तो अफसरों, दर्शकों को नहीं बुलाया जाएगा। प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा का कहना है कि सर्वदलीय बैठक में सबसे बात करके निर्णय लिया जाएगा।

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